दिल्ली : भारतीय राजनीति में एक बड़ा उलटफेर सामने आया है। Raghav Chadha ने आम आदमी पार्टी (AAP) से अलग होकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने की घोषणा कर दी है। उन्होंने Sandeep Pathak और Ashok Kumar Mittal के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह बड़ा ऐलान किया।

प्रेस वार्ता के दौरान राघव चड्ढा ने कहा कि राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के दो-तिहाई सदस्य संवैधानिक प्रावधानों के तहत बीजेपी में शामिल होने का निर्णय ले चुके हैं। इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है और इसे AAP के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
पार्टी से नाराजगी बनी वजह
हाल ही में आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा में डिप्टी लीडर की जिम्मेदारी राघव चड्ढा से लेकर अशोक कुमार मित्तल को सौंप दी थी। इस फैसले पर चड्ढा ने सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि वे लगातार जनहित के मुद्दे उठाते रहे हैं और यह समझ से परे है कि इससे पार्टी को क्या नुकसान हुआ।

चड्ढा ने भावुक अंदाज में कहा कि उन्होंने अपने 15 साल इस पार्टी को दिए, लेकिन अब पार्टी अपने मूल सिद्धांतों और नैतिकताओं से भटक चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी अब राष्ट्रीय हित के बजाय निजी स्वार्थों पर काम कर रही है।
“सही आदमी, गलत पार्टी में था”
अपने बयान में चड्ढा ने कहा, “मैं सही आदमी हूं, लेकिन गलत पार्टी में था।” उन्होंने यह भी कहा कि यह एहसास उन्हें पिछले कुछ वर्षों में लगातार होता रहा। इसी कारण उन्होंने AAP से अलग होकर जनता के बीच जाने का निर्णय लिया।
राजनीतिक सफर: वॉलंटियर से रणनीतिकार तक
Arvind Kejriwal के नेतृत्व में राघव चड्ढा ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी। साल 2013 में Anna Hazare के इंडिया अगेंस्ट करप्शन आंदोलन के दौरान उनकी मुलाकात केजरीवाल से हुई।
पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट चड्ढा ने London School of Economics से पढ़ाई पूरी की और भारत लौटकर राजनीति में सक्रिय हुए। उन्होंने दिल्ली जनलोकपाल बिल के ड्राफ्ट में भी अहम भूमिका निभाई और जल्द ही पार्टी के प्रमुख प्रवक्ताओं में शामिल हो गए।
चुनावी प्रदर्शन और उपलब्धियां
साल 2019 में उन्होंने दक्षिणी दिल्ली लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन जीत हासिल नहीं कर सके। हालांकि, 2020 में दिल्ली विधानसभा चुनाव में राजेंद्र नगर सीट से जीत दर्ज कर उन्होंने अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत की।
मार्च 2022 में उन्हें पंजाब से राज्यसभा भेजा गया, जहां वे सबसे युवा सांसदों में शामिल हुए। पंजाब विधानसभा चुनाव में AAP की जीत में उनकी रणनीतिक भूमिका को भी काफी अहम माना गया।
आगे क्या?
राघव चड्ढा का यह कदम न केवल AAP के लिए एक बड़ा झटका है, बल्कि आगामी राजनीतिक समीकरणों पर भी इसका असर पड़ सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि BJP में शामिल होने के बाद उनकी भूमिका क्या होगी और यह फैसला राष्ट्रीय राजनीति को किस दिशा में ले जाएगा।












