देहरादून : देहरादून में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक अहम उपलब्धि सामने आई है, जहां श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में बिना सर्जरी घुटने के गंभीर दर्द का सफल इलाज किया गया। यह उपचार आधुनिक कूल्ड रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन (RFA) तकनीक के जरिए किया गया, जिसे दर्द प्रबंधन के क्षेत्र में एक उन्नत और प्रभावी विकल्प माना जा रहा है।

यह मामला खास इसलिए भी है क्योंकि देहरादून में इस तकनीक का उपयोग कर घुटनों के दर्द का यह शुरुआती सफल उदाहरण माना जा रहा है। इस प्रक्रिया ने खासकर उन मरीजों के लिए उम्मीद जगाई है, जो सर्जरी से बचना चाहते हैं या किसी कारणवश ऑपरेशन के लिए उपयुक्त नहीं होते।
क्या है कूल्ड RFA तकनीक?
कूल्ड RFA एक न्यूनतम हस्तक्षेप (Minimally Invasive) प्रक्रिया है, जिसमें विशेष सुई की मदद से घुटनों की उन नसों को टारगेट किया जाता है जो दर्द के संकेत मस्तिष्क तक पहुंचाती हैं। इन नसों की सक्रियता को नियंत्रित करने से दर्द में काफी कमी आती है और मरीज को लंबे समय तक राहत मिलती है।

इस प्रक्रिया की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें न तो बड़ा ऑपरेशन करना पड़ता है और न ही कोई बड़ा चीरा लगाया जाता है। मरीज को उसी दिन अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है और रिकवरी भी काफी तेज होती है।
64 वर्षीय मरीज को मिला नया जीवन
इस तकनीक का लाभ 64 वर्षीय सावित्री देवी को मिला, जो लंबे समय से ग्रेड-4 ऑस्टियोआर्थराइटिस से पीड़ित थीं। घुटनों में असहनीय दर्द के कारण उनका चलना-फिरना लगभग बंद हो गया था। पारंपरिक दवाइयों और इलाज से राहत न मिलने पर डॉक्टरों ने कूल्ड RFA तकनीक अपनाने का निर्णय लिया।

सफल प्रक्रिया के बाद मरीज को दर्द से उल्लेखनीय राहत मिली और अब वे पहले की तुलना में बेहतर तरीके से चल-फिर पा रही हैं। इससे उनकी जीवन गुणवत्ता में स्पष्ट सुधार देखने को मिला है।
विशेषज्ञों की राय
इस सफल प्रक्रिया का नेतृत्व पेन मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. गिरीश कुमार सिंह ने किया। उन्होंने बताया कि उनका उद्देश्य मरीजों को बिना बड़ी सर्जरी के सुरक्षित और प्रभावी इलाज उपलब्ध कराना है। उनके अनुसार, कूल्ड RFA तकनीक घुटनों के पुराने दर्द के इलाज में एक “गेम-चेंजर” साबित हो रही है।
इस प्रक्रिया में पेन मेडिसिन टीम के डॉ. आदित्य सेमवाल, प्रणय हटवाल सहित नर्सिंग स्टाफ और तकनीकी टीम का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।
उत्तराखंड के मरीजों को मिलेगा फायदा
अब तक यह सुविधा देश के चुनिंदा महानगरों और उन्नत मेडिकल सेंटरों तक सीमित थी, लेकिन देहरादून में इसकी शुरुआत होने से उत्तराखंड के मरीजों को अपने ही शहर में अत्याधुनिक उपचार उपलब्ध हो सकेगा।
कम खर्च, CGHS कैशलेस सुविधा और कम जोखिम के कारण यह तकनीक बुजुर्ग और हाई-रिस्क मरीजों के लिए एक सुरक्षित विकल्प बनकर उभर रही है।











