देहरादून : 1 जून 2026: उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है। गदरपुर विधायक अरविंद पांडेय के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रति बदले रुख और उनकी खुलकर की गई प्रशंसा ने सियासी गलियारों में तीखी चर्चाएं शुरू कर दी हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक तस्वीर इस बदलाव का केंद्र बन गई है।
वायरल तस्वीर और बैठक का महत्व
तस्वीर में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, गदरपुर विधायक अरविंद पांडेय, भाजपा संगठन महामंत्री अजय कुमार, प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और प्रभारी मंत्री दुश्यंत गौतम साथ नजर आ रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मुलाकात महज औपचारिक नहीं बल्कि पार्टी के भीतर समीकरणों में हो रहे बदलाव का संकेत हो सकती है।
अरविंद पांडेय पिछले कई वर्षों से अपने बेबाक बयानों और कभी-कभी पार्टी लाइन से अलग राय रखने के लिए चर्चा में रहते रहे हैं। ऐसे में उनका धामी के प्रति सकारात्मक रुख कई लोगों के लिए आश्चर्यजनक है।
अरविंद पांडेय का धामी को बड़ा समर्थन
हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान अरविंद पांडेय ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की भरपूर तारीफ की। उन्होंने धामी को “देश का सबसे ईमानदार मुख्यमंत्री” बताया। पांडेय ने कहा कि पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व पर उन्हें पूरा भरोसा है और वे वर्ष 2047 तक उन्हें उत्तराखंड का मुख्यमंत्री देखना चाहते हैं।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तराखंड भाजपा अपनी आंतरिक एकजुटता और आगामी रणनीतियों को मजबूत करने में जुटी हुई है।
राजनीतिक विश्लेषण और संभावित प्रभाव
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, अरविंद पांडेय जैसे प्रभावशाली विधायक का खुलकर समर्थन धामी के नेतृत्व को और मजबूती प्रदान कर सकता है। यह पार्टी के भीतर विभिन्न गुटों में समन्वय बढ़ाने का संकेत भी माना जा रहा है।
पांडेय का यह रुख भाजपा की आंतरिक एकता को प्रदर्शित करता है, खासकर उस समय जब राज्य में विकास कार्यों, पर्यटन, रोजगार और युवा नीतियों पर फोकस बढ़ रहा है। धामी सरकार के कार्यकाल में पहाड़ी क्षेत्रों के विकास, सड़क निर्माण, स्वास्थ्य सुविधाओं और आपदा प्रबंधन जैसे मुद्दों पर काफी काम हुआ है, जिसकी पांडेय ने भी सराहना की।
BJP में बढ़ती एकजुटता के संकेत
उत्तराखंड भाजपा में हाल के महीनों में कई बड़े नेताओं ने मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व पर भरोसा जताया है। अरविंद पांडेय का बयान इस श्रृंखला की नवीनतम कड़ी माना जा रहा है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि आगामी चुनावी तैयारियों और संगठनात्मक मजबूती के लिए यह एकता बेहद महत्वपूर्ण है।






