देहरादून : उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) संगठन और संघ के स्तर पर कराए गए आंतरिक सर्वे में बड़ा संकेत मिलने का दावा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य की 47 विधानसभा सीटों पर कराए गए फीडबैक में 32 विधायकों के खिलाफ स्थानीय स्तर पर गहरी नाराजगी सामने आई है। बताया जा रहा है कि पार्टी इस फीडबैक के आधार पर कई सीटों पर नए चेहरों को मौका देने पर विचार कर सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार, लोगों में सरकार की तुलना में स्थानीय विधायकों के प्रति अधिक असंतोष देखने को मिला है। सर्वे में विकास कार्यों की सराहना के साथ-साथ प्रशासनिक कार्यशैली, स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपलब्धता और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर नाराजगी दर्ज होने की बात कही गई है।
सरकार नहीं, स्थानीय विधायक बने चिंता का विषय
आंतरिक फीडबैक के मुताबिक राज्य में सरकार के कामकाज को लेकर अपेक्षाकृत कम असंतोष है, लेकिन कई क्षेत्रों में स्थानीय विधायकों के प्रदर्शन को लेकर सवाल उठे हैं। पार्टी संगठन इन शिकायतों को दूर करने की रणनीति पर काम कर रहा है।
सीएम धामी के लिए सुरक्षित सीट पर भी चर्चा
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि पार्टी नेतृत्व मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के लिए एक सुरक्षित विधानसभा सीट के विकल्प पर भी विचार कर रहा है, ताकि वे पूरे प्रदेश में चुनाव प्रचार पर अधिक ध्यान दे सकें। उल्लेखनीय है कि पिछले विधानसभा चुनाव में धामी खटीमा सीट से चुनाव हार गए थे, जबकि बाद में उन्होंने चंपावत उपचुनाव जीतकर विधानसभा में वापसी की थी।
कमजोर विपक्ष के बावजूद सतर्क भाजपा
सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि चुनावी जीत-हार में केवल विपक्ष की मजबूती या कमजोरी ही निर्णायक नहीं होती, बल्कि स्थानीय स्तर पर उम्मीदवार के प्रति जनता की राय अधिक प्रभाव डालती है। इसी कारण संगठन इस बार उम्मीदवार चयन में फीडबैक को विशेष महत्व दे सकता है।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि पिछली बार हारी 23 सीटों में से लगभग 10 सीटों पर भाजपा की स्थिति पहले से बेहतर मानी जा रही है।








