सोमेश्वर : उत्तराखंड की खेल मंत्री रेखा आर्य के अपने विधानसभा क्षेत्र सोमेश्वर में एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। अल्मोड़ा जिले के शहीद बिशन सिंह बोरा अटल उत्कृष्ट राजकीय इंटर कॉलेज के कक्षा 8वीं और 9वीं के दो होनहार टेबल टेनिस खिलाड़ी रविवार को अभ्यास के लिए त्रिवेणी घाट स्थित उस स्थान पर पहुंच गए, जहां सामान्यतः शव रखे जाते हैं। स्कूल में सीमित सुविधा और बाहर समुचित खेल स्थल न होने के कारण इन बच्चों को श्मशान घाट में अपनी प्रतिभा निखारने के लिए मजबूर होना पड़ा।
खेल मंत्री के क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव
सोमेश्वर विधानसभा क्षेत्र का लंबे समय से प्रतिनिधित्व कर रही प्रदेश की खेल मंत्री रेखा आर्य के अपने इलाके में खिलाड़ियों के लिए अब तक समुचित खेल हॉल, आधुनिक उपकरण और नियमित प्रशिक्षण जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पाई हैं। दोनों बच्चे टेबल टेनिस में आगे बढ़ने का सपना देखते हैं। स्कूल में वे नियमित अभ्यास करते हैं, लेकिन छुट्टी के दिनों में खेल मैदान या हॉल की उपलब्धता सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है। संसाधनों के अभाव के बावजूद इन बच्चों का खेल के प्रति जुनून तस्वीरों में साफ झलकता है। जब यह तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, तो लोगों ने इसे सोमेश्वर में खेल सुविधाओं की बदहाल स्थिति का आईना बताया और सीधे खेल मंत्री से सवाल पूछे।
यह सिर्फ व्यवस्था की कमी नहीं, बल्कि पूरे खेल तंत्र और मंत्री के अपने क्षेत्र की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल है। खेल मंत्री होने के बावजूद अपने गृह क्षेत्र में बच्चों को श्मशान घाट जैसे स्थान पर अभ्यास करना पड़े, यह स्थिति किसी भी तरह से स्वीकार्य नहीं कही जा सकती।
प्रशासन की त्वरित कार्रवाई, लेकिन स्थायी समाधान की मांग
मामला सामने आने के बाद प्रशासन सक्रिय हो गया। जिलाधिकारी अंशुल सिंह ने संज्ञान लेते हुए खिलाड़ियों के अभ्यास की सुविधा को लेकर पहल शुरू की और जांच के आदेश दिए। स्कूल को खुलवाया गया और दोनों बच्चों को स्कूल में रखे टेबल टेनिस कोर्ट में प्रैक्टिस करने की जगह दी गई। इसकी तस्वीरें और वीडियो भी साझा किए गए।
स्थानीय लोगों में रोष है। उनका कहना है कि प्रतिभा की कोई कमी नहीं, कमी सिर्फ अवसर और सुविधाओं की है। खिलाड़ियों को आश्वासन नहीं, बल्कि स्थायी खेल हॉल, टेबल टेनिस टेबल व अन्य उपकरण, प्रशिक्षक और नियमित अभ्यास की व्यवस्था चाहिए। यही छोटे-छोटे खिलाड़ी आगे चलकर जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर क्षेत्र का नाम रोशन कर सकते हैं। जरूरत सिर्फ इतनी है कि उनकी प्रतिभा को श्मशान घाट जैसे अस्थायी ठिकानों के बजाय सम्मानजनक और सुविधाजनक खेल परिसर मिले।







