सात फेरों के बाद 7 किलोमीटर पैदल सफर! दुल्हन को कच्चे रास्तों से पहुंचना पड़ा ससुराल, सड़क और मोबाइल नेटवर्क को तरस रहा उत्तराखंड का गांव
उत्तराखंड में विकास के दावों के बीच एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो पहाड़ों में आज भी बुनियादी सुविधाओं की कमी को उजागर करती है। चकराता ब्लॉक के उदांवा गांव में सड़क नहीं होने के कारण ग्रामीणों को आज भी दुर्गम रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है। गांव की बदहाली की तस्वीर उस वक्त सामने आई, जब अनिल चौहान की शादी के बाद उनकी दुल्हन शर्मिला को सात फेरों के बाद अपने ससुराल तक पहुंचने के लिए कच्चे रास्तों से होकर गुजरना पड़ा।
जी हां, मुख्य सड़क से करीब सात किलोमीटर दूर स्थित ससुराल तक पहुंचने के लिए दुल्हन को दुर्गम रास्ते का सफर तय करना पड़ा। यह स्थिति पहाड़ में विकास के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
हैरानी की बात यह है कि उदांवा गांव में केवल सड़क ही नहीं, बल्कि मोबाइल नेटवर्क की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में ग्रामीणों को आवागमन के साथ-साथ संचार, स्वास्थ्य और आपातकालीन सेवाओं के लिए भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अगर किसी मरीज को अस्पताल पहुंचाना हो या आपात स्थिति में किसी को सूचना देनी हो, तो सड़क और नेटवर्क की कमी मुश्किलें और बढ़ा देती है।
ग्रामीण लंबे समय से गांव को सड़क से जोड़ने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं होने से लोगों में नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि विकास की बातें तो होती हैं, लेकिन उनके गांव तक आज भी बुनियादी सुविधाएं नहीं पहुंच पाई हैं।
वहीं, विवाह समारोह में शामिल हुए रुद्रसेना के संस्थापक राकेश तोमर उत्तराखंडी ने गांव को सड़क से जोड़ने के लिए हर स्तर पर प्रयास करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना यानी पीएमजीएसवाई के विभागीय प्रमुख का घेराव किया जाएगा। इसके साथ ही मुख्यमंत्री से मुलाकात कर उदांवा गांव के लिए सड़क निर्माण की मांग प्रमुखता से उठाई जाएगी।
ग्रामीणों की मांग है कि सड़क निर्माण के लिए जल्द सर्वेक्षण करवाकर स्वीकृति की प्रक्रिया शुरू की जाए और मोबाइल नेटवर्क की समस्या का भी स्थायी समाधान किया जाए।
अब सवाल यह है कि आखिर कब तक पहाड़ के ग्रामीण सड़क, संचार और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करते रहेंगे? उदांवा गांव की यह तस्वीर बताती है कि विकास की असली कसौटी दावे नहीं, बल्कि गांवों तक पहुंचने वाली सुविधाएं हैं।










