लोहाघाट : उत्तराखंड के चंपावत जिले के लोहाघाट क्षेत्र से एक बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां बोर्ड परीक्षा के परिणाम से निराश होकर 10वीं कक्षा के एक छात्र ने आत्महत्या का प्रयास किया। घटना ने न केवल परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है।
जानकारी के अनुसार, गुमदेश क्षेत्र के एक विद्यालय में पढ़ने वाले 16 वर्षीय छात्र को उत्तराखंड बोर्ड परीक्षा में 73 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए थे। परिणाम घोषित होने के बाद छात्र गहरे मानसिक दबाव में आ गया। परिजनों के मुताबिक, वह अपने अंकों से संतुष्ट नहीं था और इसी कारण उसने घर के भीतर फांसी लगाकर जान देने की कोशिश की।
पड़ोस की बच्ची बनी जीवनरक्षक, तुरंत दी सूचना
घटना के दौरान एक पड़ोसी बच्ची किसी काम से छात्र के कमरे में पहुंची। वहां का दृश्य देखकर वह घबरा गई और तुरंत परिजनों को इसकी सूचना दी। समय रहते परिजनों और ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर छात्र को फंदे से नीचे उतारा और तत्काल लोहाघाट उप जिला चिकित्सालय पहुंचाया।
प्राथमिक उपचार के दौरान चिकित्सकों ने छात्र की हालत गंभीर बताई। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विराज राठी के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने तत्काल उपचार शुरू किया। स्थिति को नाजुक देखते हुए छात्र को बेहतर इलाज के लिए चंपावत जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।
तीन भाई-बहनों में सबसे छोटा, परिवार सदमे में
ग्रामीणों के अनुसार, छात्र अपने परिवार में तीन भाई-बहनों में सबसे छोटा है। इस घटना के बाद परिवार में गहरा सदमा है। परिजनों का कहना है कि छात्र पढ़ाई में ठीक था, लेकिन रिजल्ट को लेकर उसने अत्यधिक दबाव महसूस किया।
विशेषज्ञों की सलाह: रिजल्ट नहीं, मानसिक स्वास्थ्य है अहम
यह घटना एक बार फिर छात्रों में बढ़ते मानसिक दबाव और परीक्षा परिणामों को लेकर समाज में बनी धारणा पर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अभिभावकों और शिक्षकों को बच्चों पर अनावश्यक दबाव डालने से बचना चाहिए और उन्हें भावनात्मक रूप से मजबूत बनाना चाहिए।









