चमोली : उत्तराखंड के चमोली जिले के थराली विकासखंड अंतर्गत कैरा गांव में एक अत्यंत दुखद और हृदयविदारक घटना घटी है। रविवार दोपहर चाचा की अंत्येष्टि की तैयारियों के दौरान लकड़ी बटोर रहे 30 वर्षीय युवक दिग्विजय सिंह की पहाड़ी से गिरे भारी पत्थर की चपेट में आने से मौत हो गई। यह घटना स्थानीय स्तर पर शोक की लहर फैला गई है।
ग्रामीणों के अनुसार, हर्षपाल रावत के दिव्यांग भाई भोपाल रावत (50 वर्ष) की लंबी बीमारी के बाद रविवार को निधन हो गया था। पूरे गांव ने अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू कर दी थीं। पैतृक घाट कैराबगड़ प्राणमति गदेरे में चिता तैयार करने के लिए दिग्विजय सिंह अन्य ग्रामीणों के साथ लकड़ियां इकट्ठा कर रहा था। तभी अचानक ऊपरी पहाड़ी से एक बड़ा पत्थर ढीला होकर उनके ऊपर गिर पड़ा।
गंभीर चोटें और प्रयास
पत्थर सीधे दिग्विजय सिंह के सिर और शरीर पर गिरा, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। ग्रामीणों ने तुरंत उन्हें उठाया और थराली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही इलाके में अफसोस की लहर दौड़ गई।
दिग्विजय सिंह 108 आकस्मिक सेवा वाहन का चालक था और जनसेवा के क्षेत्र में जाना-पहचाना नाम था। उसके पिता हर्षपाल रावत भी नारायणबगड़ में 108 आकस्मिक वाहन सेवा से जुड़े हुए हैं। परिवार पहले से ही भोपाल रावत के निधन से सदमे में था, ऊपर से बेटे की इस अकाल मृत्यु ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया है।
परिवार और गांव पर असर
पूर्व प्रधान कैरा मोहन सिंह ने बताया कि पूरा गांव इस दोहरी त्रासदी से स्तब्ध है। दिग्विजय सिंह न सिर्फ परिवार का सहारा था बल्कि गांव का सक्रिय और जिम्मेदार युवा भी था। उसका अंतिम संस्कार सोमवार को किया जाएगा। घटना के बाद से कैरा गांव में मातम का माहौल छाया हुआ है। लोग लगातार परिवार के घर पहुंचकर शोक संवेदना व्यक्त कर रहे हैं।
यह घटना पहाड़ी क्षेत्रों में अंत्येष्टि जैसी संवेदनशील गतिविधियों के दौरान सुरक्षा की कमी को भी उजागर करती है। खड़ी चट्टानों और ढीली मिट्टी वाले इलाकों में ऐसे हादसे अक्सर होते रहते हैं, लेकिन इस बार यह हादसा अंतिम संस्कार की घड़ी में हुआ, जिसने दर्द को दोगुना कर दिया।









