उर्मिला सनावर की गिरफ्तारी का अंकिता भंडारी केस के नार्को टेस्ट से कोई संबंध नहीं, हरिद्वार पुलिस ने सोशल मीडिया पोस्ट को बताया भ्रामक
हरिद्वार: उर्मिला सनावर की गिरफ्तारी को अंकिता भंडारी हत्याकांड में नार्को टेस्ट से बचाने की कार्रवाई बताने वाली सोशल मीडिया पोस्ट को हरिद्वार पुलिस ने भ्रामक करार दिया है। एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने साफ किया है कि उर्मिला सनावर की गिरफ्तारी एक अलग मामले में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है। इसका अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच और नार्को टेस्ट की प्रक्रिया से कोई संबंध नहीं है।
मंगलवार को मीडिया से बातचीत के दौरान एसएसपी ने बताया कि उर्मिला सनावर के खिलाफ रानीपुर कोतवाली में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 308(5), 308(7), 79, 356(3), 356(2) और स्त्री अशिष्ट रूपण (प्रतिषेध) अधिनियम, 1986 की धारा 4/10 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि इस मामले में धारा 308 की उपधाराएं 5 और 7 महत्वपूर्ण हैं। मामला सेशन ट्रायल के प्रावधानों के अंतर्गत आने के चलते पुलिस ने गिरफ्तारी की कार्रवाई की।
एसएसपी के अनुसार, 24 अक्टूबर को प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस टीम को सहारनपुर भेजा गया था। पुलिस ने उर्मिला सनावर को उनके घर से गिरफ्तार किया। इसके बाद उन्हें हरिद्वार जिला एवं सत्र न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने यह भी स्पष्ट किया कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में नार्को टेस्ट का मामला अलग है और इसकी जांच दूसरी एजेंसी कर रही है। संबंधित जांच एजेंसी कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद नार्को टेस्ट करा सकती है। इसके लिए संबंधित व्यक्ति की सहमति और न्यायालय का आदेश आवश्यक है।
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि उर्मिला सनावर की गिरफ्तारी को अंकिता भंडारी हत्याकांड के नार्को टेस्ट से जोड़कर पेश करना सही नहीं है। दोनों मामले अलग-अलग हैं और अपनी-अपनी कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ रहे हैं।











