उत्तराखंड सरकार ने राज्य के चार प्रमुख जिलों — देहरादून, हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर और नैनीताल — के सभी मदरसों में विस्तृत जांच के आदेश जारी किए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट कहा कि बच्चों की सुरक्षा, पारदर्शिता और कानून का पालन सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सरकार के संज्ञान में आया है कि बाहरी राज्यों से बच्चों को उत्तराखंड के मदरसों में लाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे को बेहद गंभीरता से लिया है और कहा कि ऐसे किसी भी प्रयास को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा जो बच्चों के हितों या राज्य की कानूनी व्यवस्था के खिलाफ हो।
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के निर्देश: जिलाधिकारियों को सौंपी जिम्मेदारी
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने देहरादून, हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर और नैनीताल के जिलाधिकारियों को तुरंत प्रभाव से व्यापक सत्यापन अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।
जांच में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर गहन पड़ताल की जाएगी:
बच्चों के आगमन का स्रोत (किस राज्य से आए हैं)
अभिभावकों की लिखित सहमति
बच्चों को लाने वाले व्यक्तियों की पहचान और पृष्ठभूमि
मदरसों में प्रवेश की प्रक्रिया की वैधता
शासन ने सभी जिलाधिकारियों से पूरे प्रकरण की विस्तृत रिपोर्ट शीघ्र प्रस्तुत करने को कहा है।
सोशल मीडिया पर वायरल सूचना पर कार्रवाई
सरकार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से इस जानकारी का संज्ञान मिला था कि बाहरी राज्यों से बच्चे राज्य के मदरसों में लाए जा रहे हैं। इस सूचना को गंभीरता से लेते हुए तुरंत प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
प्रदेश में मदरसों की वर्तमान स्थिति
उत्तराखंड में वर्तमान में कुल 452 पंजीकृत मदरसे संचालित हैं। सरकार का मानना है कि अल्पसंख्यक समुदाय की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के साथ-साथ पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और जवाबदेह बनाना आवश्यक है।
1 जुलाई 2026 से बदल जाएगी पूरी व्यवस्था
सरकार ने वर्ष 2025 में उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम लागू किया है। इस अधिनियम के तहत 1 जुलाई 2026 से प्रदेश का मदरसा बोर्ड समाप्त हो जाएगा। इसके बाद राज्य के सभी मदरसों को उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा बोर्ड से संबद्धता लेनी होगी और उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से अनिवार्य मान्यता प्राप्त करनी होगी।
यह नई व्यवस्था मदरसों में आधुनिक शिक्षा, बेहतर ढांचागत सुविधाएं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
सरकार का संदेश: शिक्षा के नाम पर कोई समझौता नहीं
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया कि शिक्षा का अधिकार हर बच्चे का मौलिक अधिकार है, लेकिन इसे किसी भी प्रकार की अनियमितता या अवैध गतिविधियों के लिए इस्तेमाल नहीं होने दिया जाएगा। सरकार की यह पहल न केवल बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र में पारदर्शिता भी बढ़ाएगी।
जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि कोई अनियमितता सामने आई तो संबंधित मदरसों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।












