हरिद्वार : उत्तराखंड में छात्रवृत्ति घोटाले की जांच तेज होने के साथ ही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक बार फिर बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू कर दी है। कैबिनेट मंत्री की पार्टनरशिप वाली मदरहूड यूनिवर्सिटी को सील किए जाने की खबर से घोटालेबाजों में हड़कंप मच गया है। कई वर्षों से चले आ रहे इस घोटाले में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के नेता व उनके करीबी शामिल बताए जा रहे हैं।
घोटाले की पृष्ठभूमि और राजनीतिक कनेक्शन
छात्रवृत्ति घोटाला उत्तराखंड के शिक्षा क्षेत्र को प्रभावित करने वाला सबसे बड़ा वित्तीय अनियमितता मामला माना जा रहा है। इसमें फर्जी दाखिलों, नकली दस्तावेजों और भ्रामक दावों के आधार पर करोड़ों रुपये की छात्रवृत्ति राशि हड़पी गई। कई आरोपी पहले ही जेल जा चुके हैं, लेकिन ईडी की नई कार्रवाई से बचे हुए आरोपियों में बेचैनी बढ़ गई है।
हरिद्वार जिले के बहादराबाद, रुड़की और आसपास के क्षेत्र इस घोटाले के प्रमुख केंद्र रहे हैं। यहां के कई प्रतिष्ठित स्कूलों और कॉलेजों के नाम घोटाले में उजागर हुए हैं। इनमें से अधिकांश संस्थान स्थानीय व राष्ट्रीय स्तर के राजनीतिक नेताओं से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए बताए जाते हैं।
शामिल प्रमुख संस्थान और फर्जीवाड़े की राशि
ईडी की जांच के अनुसार, निम्नलिखित संस्थानों ने बड़ी मात्रा में छात्रवृत्ति राशि अवैध रूप से प्राप्त की:
ओम बायो साइंस एंड टेक्नोलॉजी / ओम बायो साइंस एंड फार्मा कॉलेज, दौलतपुर, रुड़की (बहादराबाद) – 2.48 करोड़ रुपये
ग्रीन वे इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, रुड़की-देहरादून हाईवे – 1.96 करोड़ रुपये
हिमालयन दून एकेडमी, गागलहेडी रोड, सिकंदरपुर, भगवानपुर – 2.54 करोड़ रुपये
सुभारती प्राइवेट आईटीआई, सैनी कैंपस, बेडपुर, रुड़की – 1.18 करोड़ रुपये
इसके अलावा, सहारनपुर (यूपी) के यूपी कॉलेज ऑफ पॉलिटेक्निक फॉर रिसर्च (30 लाख), कृष्णा कॉलेज ऑफ लॉ (19 लाख), स्वामी विवेकानंद पॉलिटेक्निक (11 लाख) और एमआईएमटी छुटमलपुर (10 लाख) जैसे संस्थान भी घोटाले में शामिल पाए गए। हिमाचल प्रदेश के हिमालयन ग्रुप ऑफ प्रोफेशनल इंस्टीट्यूट, कालांब (16 लाख) का भी नाम सामने आया है।
ग्रीन वे इंस्टीट्यूट का संबंध रुड़की के कांग्रेस नेता अशोक चौहान से बताया जा रहा है।
राजनीतिक नेताओं के रिश्तेदारों का रोल
घोटाले में कई स्थानीय नेताओं के रिश्तेदारों के नाम भी उजागर हुए हैं। इनमें भाजपा के पूर्व विधायकों और वर्तमान प्रभावशाली नेताओं के करीबी शामिल हैं:
जिनमें मुनीष सैनी के साथ पूर्व विधायक सुरेश चंद जैन का भतीजा (वर्तमान में सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में सक्रिय) भी शामिल है
मंगलौर से विधायक काजी निजामुद्दीन का भाई (जो पहले जेल जा चुका है)
ये नामी-गिरामी स्कूल विधानसभा चुनाव लड़ चुके नेताओं और बड़े नेताओं के प्रभाव क्षेत्र में संचालित होते रहे हैं।
ईडी की कार्रवाई से मचा हड़कंप
मदरहूड यूनिवर्सिटी पर कार्रवाई के बाद अन्य आरोपी संस्थानों और व्यक्तियों में बचाव के प्रयास तेज हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार कई लोग दस्तावेजों को सुरक्षित करने, गवाहों को प्रभावित करने और कानूनी जुगाड़ लगाने में जुटे हुए हैं। ईडी की टीम लगातार छापेमारी और दस्तावेज जब्ती की प्रक्रिया में जुटी हुई है।









