उत्तराखंड में PMGSY ठेकेदारों का सरकार के खिलाफ मोर्चा! रॉयल्टी के नाम पर मनमानी पेनल्टी और बिटुमिन की बढ़ी दरों पर उठाए सवाल, रखीं 7 बड़ी मांगें
नमस्कार!
उत्तराखंड में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना यानी PMGSY के तहत काम कर रहे ठेकेदारों ने अब सरकार और विभाग के सामने अपनी मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। ठेकेदारों का आरोप है कि सरकार की ओर से रॉयल्टी के नाम पर उनके बिलों से मनमाने तरीके से पेनल्टी काटी जा रही है। इतना ही नहीं, नए शासनादेश के जरिए पेनल्टी की दरें भी बढ़ा दी गई हैं, जिससे ठेकेदारों पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है।
इसी मुद्दे को लेकर 22 अक्टूबर 2026 को विभाग की ओर से बुलाई गई बैठक में PMGSY कांट्रेक्टर एसोसिएशन ने अपनी मांगें और आपत्तियां सामने रखीं। एसोसिएशन ने साफ किया कि मौजूदा नियमों में संशोधन किया जाए और ठेकेदारों पर लगाई जा रही कथित मनमानी पेनल्टी को तत्काल वापस लिया जाए।
ठेकेदारों की पहली बड़ी मांग यह है कि उत्तराखंड के प्रत्येक ब्लॉक में चट्टानी पत्थर की खदानें यानी IN SITU क्वारी उपलब्ध नहीं हैं। वहीं, लोक निर्माण विभाग की वर्ष 2023-24 और 2024-25 की SOR दरों में ब्लॉक स्तर पर ट्रांसपोर्टेशन और एक्स-क्वारी का स्पष्ट प्रावधान नहीं है। ऐसे में ठेकेदार स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पत्थर का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इसके बावजूद उनसे रॉयल्टी के अतिरिक्त पेनल्टी वसूली जा रही है। एसोसिएशन का सवाल है कि जब ट्रांसपोर्टेशन का भुगतान ही निर्धारित नहीं है, तो ठेकेदार दूर-दराज से पत्थर लाने का खर्च कैसे उठाएं?
दूसरी मांग सड़क निर्माण के दौरान निकलने वाले पत्थर को लेकर है। ठेकेदारों का कहना है कि हिल साइड कटिंग, फॉर्मेशन कटिंग, डिफेक्ट कटिंग और फाउंडेशन कटिंग के दौरान जो पत्थर निकलता है, उसका इस्तेमाल उसी सड़क के निर्माण में किया जाता है। इसके लिए SOR में पहले से रॉयल्टी का प्रावधान है और बिलों से निर्धारित रॉयल्टी काटी जाती रही है। ऐसे में अनुबंधित कार्य सीमा के भीतर निर्माण सामग्री का इस्तेमाल करने वाले ठेकेदारों पर अतिरिक्त पेनल्टी लगाना उचित नहीं है।
तीसरी मांग सैंड, ग्रिट और डस्ट जैसी निर्माण सामग्री को लेकर है। एसोसिएशन का कहना है कि ठेकेदार ये सामग्री निर्धारित क्वारी से रॉयल्टी और रवन्ने के साथ खरीदते हैं और संबंधित निर्माण कार्यदायी संस्थाओं के कार्यालयों में रवन्ने भी जमा करवाते हैं। इसके बावजूद पेनल्टी लगाने का आधार क्या है?
चौथी मांग में एसोसिएशन ने प्रदेश में चट्टानी पत्थर की खदानों की कमी का मुद्दा उठाया है। पर्यावरणीय प्रतिबंधों, रिजर्व फॉरेस्ट, भू-स्वामियों की आपत्तियों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों के कारण कई ब्लॉकों में खदानें उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में दूसरे क्षेत्रों से पत्थर लाने पर अतिरिक्त ट्रांसपोर्टेशन खर्च आता है, लेकिन SOR में इसका भुगतान निर्धारित नहीं है। ठेकेदारों का कहना है कि जब स्थानीय सामग्री उपलब्ध है और उसका इस्तेमाल नियमों के अनुसार किया जा रहा है, तो अतिरिक्त पेनल्टी क्यों लगाई जा रही है?
पांचवीं और बेहद अहम मांग यह है कि ठेकेदारों से पहले वसूली गई दोगुनी पेनल्टी वापस की जाए। साथ ही नए सर्कुलर के माध्यम से बढ़ाई गई पेनल्टी की दरों को तत्काल वापस लेने के आदेश जारी किए जाएं।
छठी मांग जिला खनिज फाउंडेशन यानी DMF और जिला न्यास के नाम पर होने वाली कटौती को लेकर है। एसोसिएशन का कहना है कि यह राशि खनन गतिविधियों से प्रभावित क्षेत्रों में क्षतिपूर्ति और विकास कार्यों के लिए खर्च की जाती है। लेकिन सड़क निर्माण करने वाले ठेकेदारों के बिलों से यह कटौती किए जाने के बावजूद उन्हें सड़क निर्माण में होने वाले नुकसान या क्षति की भरपाई के लिए इसका लाभ नहीं मिलता। इसलिए ठेकेदारों ने DMF के नाम पर होने वाली कटौती को भी तत्काल बंद करने की मांग की है।
अब बात करते हैं सातवीं और सबसे बड़ी मांग की, जो बिटुमिन की लगातार बढ़ती कीमतों से जुड़ी है। एसोसिएशन का कहना है कि मार्च 2026 के बाद अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते समुद्री मार्गों में आई बाधाओं से पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति प्रभावित हुई, जिसका असर बिटुमिन की कीमतों पर पड़ा। ऐसे में निर्माण लागत काफी बढ़ गई है।
ठेकेदारों के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश में 3.75 मीटर चौड़ी सड़क के लिए 5 लाख रुपये प्रति किलोमीटर की दर से अतिरिक्त भुगतान का प्रावधान किया गया है और पहली किस्त के रूप में 22 करोड़ रुपये भी जारी किए जा चुके हैं। एसोसिएशन का दावा है कि उत्तर प्रदेश समेत उत्तर भारत के अन्य राज्यों में भी बढ़ी हुई दरों के अनुसार भुगतान की व्यवस्था की गई है, लेकिन उत्तराखंड में अभी तक ठेकेदारों को राहत नहीं मिली है।
एसोसिएशन ने SBD के क्लॉज 54.3 का हवाला देते हुए कहा कि आपात परिस्थितियों में दरों में बदलाव का प्रावधान पहले से मौजूद है। ऐसे में सरकार को बिटुमिन की बढ़ी हुई कीमतों के अनुरूप ठेकेदारों को अतिरिक्त भुगतान करना चाहिए, ताकि सड़क निर्माण कार्य प्रभावित न हों।
वहीं, अगर सरकार बढ़ी हुई दरों का भुगतान करने की स्थिति में नहीं है, तो ठेकेदारों ने मांग की है कि वर्तमान में लंबित बिटुमिन आधारित कार्यों पर जीरो पेनल्टी के साथ अनुबंध समाप्त किए जाएं और नई दरों के आधार पर दोबारा अनुबंध गठित किए जाएं।
एसोसिएशन का कहना है कि मौजूदा कीमतों पर अपनी जेब से भारी नुकसान उठाकर सड़क निर्माण जारी रखना ठेकेदारों के लिए संभव नहीं है।
अब देखना होगा कि 22 अक्टूबर को हुई इस बैठक में ठेकेदारों की इन सात मांगों पर विभाग और सरकार क्या फैसला लेते हैं। क्या रॉयल्टी के नाम पर लगाई जा रही पेनल्टी वापस होगी? क्या DMF कटौती और बिटुमिन की बढ़ी कीमतों पर ठेकेदारों को राहत मिलेगी?
फिलहाल PMGSY ठेकेदारों ने सरकार से जल्द निर्णय लेकर संशोधित आदेश जारी करने की मांग की है, ताकि प्रदेश में ग्रामीण सड़कों का निर्माण बिना किसी आर्थिक बाधा के जारी रह सके।











