देहरादून : उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने देहरादून के सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में प्रेस वार्ता कर नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023 को भारतीय लोकतंत्र का स्वर्णिम अध्याय बताया। समाजसेवी डॉ. पारुल दीक्षित और अधिवक्ता शिखा शर्मा बिष्ट भी इस अवसर पर मौजूद रहीं। अध्यक्ष ने कहा कि यह अधिनियम केवल आरक्षण नहीं, बल्कि विकसित भारत2047 के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।
16 अप्रैल को संसद की ऐतिहासिक बैठक: महिलाओं के आरक्षण का निर्णायक मोड़
कुसुम कंडवाल ने विशेष रूप से 16 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाली संसद की विशेष बैठक का जिक्र किया। हाल ही में केंद्रीय कैबिनेट ने इस अधिनियम के क्रियान्वयन से जुड़े तीन महत्वपूर्ण संशोधन विधेयकों को मंजूरी दी है। इनमें लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 816 करने, महिलाओं के लिए एक-तिहाई (लगभग 273) सीटें आरक्षित करने और 2011 जनगणना के आधार पर परिसीमन प्रक्रिया तेज करने का प्रावधान शामिल है। यह बैठक 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले आरक्षण लागू करने की दिशा में निर्णायक साबित हो सकती है।

अध्यक्ष ने बताया कि सितंबर 2023 में पारित यह संवैधानिक संशोधन लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं को 33% आरक्षण सुनिश्चित करता है। वर्तमान में लोकसभा में महिलाओं की संख्या 1952 के 22 से बढ़कर 2024 में 75 हो गई है, लेकिन यह अभी भी कुल सीटों का मात्र 14% के आसपास है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम इस खाई को पाटते हुए महिलाओं को शासन की मुख्यधारा में लाएगा।
महिला-नेतृत्व वाला विकास: प्रधानमंत्री मोदी के विजन की सराहना
कुसुम कंडवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘महिला-नेतृत्व वाले विकास’ (Women-led Development) के विजन की प्रशंसा की। उन्होंने कहा, “महिलाएं अब योजनाओं की लाभार्थी मात्र नहीं रहेंगी, बल्कि नीति निर्माण की निर्माता बनेंगी। जब महिलाएं नेतृत्व करती हैं, तो अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ती है और समावेशी विकास सुनिश्चित होता है।”
वैश्विक अध्ययनों के अनुसार, लैंगिक समानता बढ़ने से विश्व अर्थव्यवस्था में 7 ट्रिलियन डॉलर की अतिरिक्त वृद्धि संभव है। उत्तराखंड देवभूमि के साथ-साथ नारी शक्ति की भूमि भी है। राज्य महिला आयोग इस ऐतिहासिक अधिनियम के सफल क्रियान्वयन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, ताकि आगामी चुनावों में महिलाओं की भागीदारी लोकतंत्र को अधिक पारदर्शी और संवेदनशील बना सके।
महिला सशक्तिकरण के ठोस आंकड़े: योजनाओं का प्रभाव
प्रेस वार्ता में महिला सशक्तिकरण से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े साझा किए गए:
मुद्रा योजना के तहत 69% ऋण महिलाओं को दिए गए।
जन धन योजना में 32.29 करोड़ महिलाओं के बैंक खाते खोले गए।
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान से माध्यमिक स्तर पर लड़कियों का नामांकन 80.2% तक पहुंचा।
भारत में 43% STEM स्नातक महिलाएं हैं।
सुकन्या समृद्धि योजना के तहत 4.6 करोड़ से अधिक खाते बेटियों के भविष्य के लिए खोले गए।
इसके अलावा, उज्ज्वला योजना के तहत 10 करोड़ LPG कनेक्शन, जल जीवन मिशन से 14.45 करोड़ घरों में नल का पानी और स्वच्छ भारत मिशन ने महिलाओं को स्वस्थ एवं गरिमापूर्ण जीवन प्रदान किया। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के माध्यम से 4.27 करोड़ से अधिक महिलाओं को पोषण सहायता मिली है।
ये योजनाएं दर्शाती हैं कि जब महिलाओं को संवैधानिक अवसर मिलते हैं, तो वे जल, शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण जैसे बुनियादी मुद्दों पर ठोस बदलाव लाती हैं।
उत्तराखंड में प्रभावी क्रियान्वयन की प्रतिबद्धता
कुसुम कंडवाल ने जोर दिया कि उत्तराखंड राज्य महिला आयोग आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों में इस अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए हर स्तर पर प्रयास करेगा। “यह अधिनियम महिलाओं को नीति की लाभार्थी से नीति की निर्माता बनाने का मार्ग प्रशस्त करेगा।”
अध्यक्ष ने समस्त मातृशक्ति और समाज से अपील की कि वे इस ऐतिहासिक परिवर्तन का पूर्ण समर्थन करें। महिला सशक्तिकरण न केवल लोकतंत्र को मजबूत करेगा, बल्कि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।









