देहरादून : देहरादून के राजपुर थाना क्षेत्र में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक महिला ने अपनी 15 वर्षीय बेटी के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई थी, लेकिन पुलिस की गहन जांच में खुलासा हुआ कि वही मां अपनी बेटी के सौदे की मास्टरमाइंड है। पैसे के लालच में उसने बेटी का सौदा कर दिया था। रकम पूरी न मिलने और पकड़े जाने के डर से उसने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की।
घटना की शुरुआत और पुलिस जांच
बीती 5 जुलाई को सहस्रधारा रोड निवासी एक महिला ने राजपुर थाने में अपनी 15 वर्षीय बेटी के अपहरण की शिकायत दर्ज कराई। एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल के निर्देश पर जांच टीमों का गठन किया गया। सर्विलांस और सीसीटीवी फुटेज की मदद से पुलिस को किशोरी की लोकेशन उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में मिली।
इसके बाद पुलिस टीम ने मुजफ्फरनगर में दबिश दी। वहां से 37 वर्षीय मनीष (निवासी जानसठ, मुजफ्फरनगर) और 24 वर्षीय लवी कुमार (निवासी फलावदा, मेरठ) को गिरफ्तार कर किशोरी को सुरक्षित बरामद कर लिया गया।
पूछताछ में सामने आया दो बार सौदे का सच
पूछताछ के दौरान लवी कुमार ने बताया कि उसने पिंकी मलिक नामक महिला के माध्यम से किशोरी को उसकी मां से खरीदा था। इसके बाद उसने किशोरी को मनीष को दो लाख रुपये में बेच दिया। पुलिस ने 37 वर्षीय पिंकी मलिक (पत्नी सुकरम, निवासी मुजफ्फरनगर) और किशोरी की मां को सहस्रधारा से गिरफ्तार कर लिया।
मामले में नए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने संबंधित धाराएं जोड़ दी हैं। चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।
सौदे की पृष्ठभूमि
आरोपी मां की मुलाकात कुछ समय पहले देहरादून के एक समारोह में मुजफ्फरनगर निवासी पिंकी मलिक से हुई थी। पिंकी के प्रस्ताव पर महिला ने अपनी 15 वर्षीय बेटी का सौदा डेढ़ लाख रुपये में कर लिया। पिंकी ने यह सौदा लवी के जरिए मनीष से दो लाख रुपये में तय किया। महिला को अब तक 80 हजार रुपये मिल चुके थे। बाकी रकम न मिलने और बेटी के गायब होने पर अपराध उजागर होने के डर से उसने अपहरण की झूठी कहानी गढ़ दी।
राजपुर थानाध्यक्ष पीडी भट्ट ने पुष्टि की है कि पुलिस की सतर्क कार्रवाई से न सिर्फ किशोरी सुरक्षित बरामद हुई, बल्कि पूरे रैकेट का पर्दाफाश भी हो गया।
पुलिस की कार्रवाई और आगे की जांच
पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। मानव तस्करी से जुड़े ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जा रही है








