उत्तराखंड में बाल कल्याण समिति की पहल से दो मासूमों की जिंदगी में लौटी मुस्कान, अब बोलना सीख रहे बच्चे
उत्तराखंड के पुरोला से एक ऐसी भावुक कर देने वाली खबर सामने आई है, जहां बाल कल्याण समिति के प्रयासों से दो मासूम बच्चों की जिंदगी बदल गई है। कभी खामोशी में जीवन बिताने वाले चार वर्षीय अनुज और तीन वर्षीय अमीषा अब बोलना सीख रहे हैं। दोनों बच्चे सामान्य बच्चों की तरह खेल-कूद रहे हैं और आंगनबाड़ी केंद्र भी जाने लगे हैं।
जिला बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष पुष्पा चौहान के अनुसार, जून 2025 में पुरोला विकासखंड से बच्चों से जुड़ा एक संवेदनशील मामला सामने आया था। बच्चों की मां घर छोड़कर जा चुकी थी, जबकि उनके पिता मानसिक रूप से अस्वस्थ थे। वहीं, 80 वर्षीय मूक-बधिर दादी भीख मांगकर दोनों बच्चों का पेट पाल रही थीं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए बाल कल्याण समिति ने बच्चों को सुरक्षित संरक्षण और पुनर्वास दिलाने के लिए कदम उठाए। पहाड़ी क्षेत्र में चाइल्ड केयर, फिट फैसिलिटी और फोस्टर केयर जैसी सुविधाओं की कमी के बीच समिति ने किशोर न्याय अधिनियम के तहत अपने अधिकारों का इस्तेमाल किया और एक विशिष्ट दत्तक ग्रहण एजेंसी को फिट फैसिलिटी घोषित किया।
नवंबर 2025 में दोनों बच्चों को रेस्क्यू कर सुरक्षित रूप से संस्थान पहुंचाया गया, जहां उनकी देखभाल शुरू हुई। अब बच्चों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है और वे धीरे-धीरे बोलना सीख रहे हैं।
वहीं, बच्चों के भविष्य और संपत्ति की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए समिति ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर पुरोला के उप जिलाधिकारी से बच्चों के पिता की जमीन बेचने पर पूर्ण रोक लगाने का अनुरोध भी किया है।
बाल कल्याण समिति की यह पहल बताती है कि सही देखभाल, सुरक्षित माहौल और समय पर मदद मिलने से मासूमों की जिंदगी में नई उम्मीद जगाई जा सकती है।










