उत्तराखंड : राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (NFHS-6) के आंकड़ों ने उत्तराखंड में महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर चिंताजनक तस्वीर पेश की है। राज्य में करीब एक-तिहाई यानी 34.3 प्रतिशत महिलाएं मोटापे की श्रेणी में हैं। शहरी क्षेत्रों में स्थिति और भी गंभीर है, जहां 42.8 प्रतिशत महिलाएं अधिक वजन से जूझ रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा 30.6 प्रतिशत है। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ता वजन सीधे तौर पर ब्लड प्रेशर और रक्त शर्करा के स्तर को बढ़ा रहा है, जिससे हृदय पर दबाव बढ़ रहा है और कोरोनरी धमनी रोग का खतरा कई गुना बढ़ गया है।
शहरी महिलाओं में मोटापा अधिक गंभीर
NFHS-6 रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में 14 प्रतिशत महिलाओं का ब्लड प्रेशर असामान्य पाया गया है, जबकि 18 प्रतिशत महिलाओं में रक्त शर्करा अनियंत्रित है। ये महिलाएं नियमित रूप से दवाइयां लेकर रक्तचाप और शुगर को नियंत्रित रखने की कोशिश कर रही हैं। चिकित्सकों का मानना है कि मोटापा बढ़ने से शरीर में इन्फ्लेमेशन बढ़ता है, जो धमनियों को नुकसान पहुंचाता है और दिल के दौरे या स्ट्रोक का जोखिम बढ़ा देता है।
देहरादून के हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के शोधकर्ताओं ने महिलाओं में कोरोनरी आर्टरी डिजीज के जोखिम कारकों का अध्ययन किया। वहीं दून मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने बताया कि अब 30 से 40 वर्ष की युवा महिलाएं भी हृदय की धमनियों में रुकावट की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रही हैं। एक 40 वर्षीय महिला की एंजियोप्लास्टी का उदाहरण देते हुए डॉक्टरों ने कहा कि पहले यह समस्या मुख्य रूप से 50-60 वर्ष की आयु में देखी जाती थी, लेकिन अब कम उम्र में ही मामले बढ़ रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की भारी कमी
जानकी जोशी और निधि त्रिवेदी के शोध में सामने आया कि उत्तराखंड की 77 प्रतिशत ग्रामीण महिलाओं में हृदय रोग के प्रति जागरूकता का स्तर बहुत कम है। इसी शोध समूह के दूसरे अध्ययन में करीब 36 वर्ष की औसत उम्र वाली ग्रामीण महिलाओं में बढ़ते वजन और हृदय रोग के बीच मजबूत संबंध पाया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि आहार में बदलाव, शारीरिक गतिविधि की कमी और तनाव ग्रामीण महिलाओं को भी शहर जितना ही प्रभावित कर रहा है।
पुरुषों की स्थिति भी चिंताजनक है। NFHS-6 के अनुसार उत्तराखंड में 33.8 प्रतिशत पुरुष तंबाकू का सेवन करते हैं। 21.4 प्रतिशत पुरुषों में रक्त शर्करा अधिक है, 26.5 प्रतिशत अधिक वजन की श्रेणी में हैं और 18.3 प्रतिशत पुरुष रक्तचाप की दवा ले रहे हैं। तंबाकू, मोटापा, शुगर और हाई ब्लड प्रेशर मिलकर पुरुषों के हृदय पर भी भारी दबाव डाल रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग की स्क्रीनिंग और बचाव के उपाय
स्वास्थ्य विभाग गांव-गांव में हृदय रोग की स्क्रीनिंग अभियान चला रहा है। चिकित्सक सलाह देते हैं कि नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, वजन नियंत्रण और समय-समय पर ब्लड प्रेशर व शुगर की जांच से हृदय को सुरक्षित रखा जा सकता है। मोटापा नियंत्रित करने से रक्तचाप और शर्करा का स्तर भी बेहतर होता है, जिससे दिल पर दबाव कम पड़ता है।







