हरिद्वार : हरिद्वार नगर निगम द्वारा की गई विवादास्पद भूमि खरीद की जांच में उत्तराखंड सरकार ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस के संकल्प को मजबूती देते हुए इस मामले में प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर बड़ी कार्रवाई की गई है।
घोटाले की पृष्ठभूमि
वर्ष 2024 के निकाय चुनावों के दौरान हरिद्वार नगर निगम ने ग्राम सराय क्षेत्र में स्थित कूड़े के ढेर के पास अनुपयुक्त कृषि भूमि को अत्यधिक ऊंची कीमत पर खरीदा था। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार करीब 13-15 करोड़ रुपये कीमत वाली इस भूमि को 54 करोड़ रुपये में खरीद लिया गया। इस अनियमितता की शिकायत मिलने के बाद मुख्यमंत्री धामी ने तुरंत विशेष जांच और ऑडिट के आदेश दिए। विजिलेंस विभाग की विस्तृत जांच में आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी और सरकारी खजाने को जानबूझकर नुकसान पहुंचाने के सबूत मिले।
धामी सरकार की निर्णायक कार्रवाई
राज्य सतर्कता समिति की सिफारिश पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले में शामिल अधिकारियों और भूमि विक्रेताओं के खिलाफ अभियोग दर्ज करने की मंजूरी दे दी है।
प्रमुख कार्रवाईयां:
तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त करने की संस्तुति।
तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह पर गंभीर लापरवाही का आरोप तय कर मेजर पनिशमेंट (दीर्घ शास्ति) की सिफारिश।
तत्कालीन एसडीएम अजयवीर सिंह के खिलाफ परनिंदा प्रविष्टि दर्ज करने और तीन वेतनवृद्धियां रोकने के निर्देश।
इनके अलावा तत्कालीन सहायक नगर आयुक्त रविंद्र कुमार दयाल, कर अधीक्षक लक्ष्मीकांत भट्ट, सहायक अभियंता आनंद सिंह मिश्रा संपत्ति लिपिक वेदपाल, मानचित्रकार दिनेश कांडपाल समेत अन्य अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो रही है। भूमि विक्रेताओं सुमन देवी, जितेंद्र कुमार, अभिषेक यादव और सुजीत कुमार सिंह के विरुद्ध भी भारतीय न्याय संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की जाएगी।
पारदर्शिता की दिशा में मजबूत कदम
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जनता के पैसे का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई जारी रहेगी। शासन की प्राथमिकता पारदर्शी, जवाबदेह और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन स्थापित करना है।
यह कार्रवाई उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ अब तक की सबसे सख्त प्रशासनिक पहल मानी जा रही है। पहले निलंबन की कार्रवाई हो चुकी है और अब बर्खास्तगी, मेजर पनिशमेंट तथा आपराधिक मुकदमों के साथ मामले को पूर्णतः निष्पक्ष जांच के दायरे में लाया गया है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
राजनीतिक और प्रशासनिक विश्लेषक इस कार्रवाई को धामी सरकार की मजबूत इच्छाशक्ति का प्रतीक मान रहे हैं। ऐसी कार्रवाइयां न केवल दोषियों को दंडित करती हैं बल्कि भविष्य में होने वाले अनियमितताओं के लिए भी निवारक साबित होती हैं।
उत्तराखंड सरकार का यह रुख पूरे राज्य में स्वच्छ प्रशासन की मिसाल बन रहा है। जनहित और पारदर्शिता को सर्वोपरि रखते हुए शासन-प्रशासन में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में धामी सरकार लगातार सक्रिय है।









